बरेली: श्री हरि मंदिर महिलाओं ने 16 श्रृंगार कर धूमधाम से मनाया करवाचौथ, वीरावती की सुनी कथा
रात में बादल छाने से छिप गया चांद, ओवरब्रिजों पर पूजन के लिए पतियों समेत पहुंची महिलाएं
बरेली। कार्तिक माह की चतुर्थी पर गुरुवार को महिलाओं ने करवाचौथ का पर्व बड़े ही हर्षोल्लास के साथ मनाया। शहर के मॉडल टॉउन स्थित हरि मंदिर में भी हर साल की तरह करवाचौथ का पर्व धूमधाम से मनाया गया। शाम ठीक 4 बजे से महिलाएं 16 श्रृंगार कर मंदिर में पहुंचीं, जहां पंडित जी ने करवाचौथ की कथा का वर्णन किया।

उन्होंने कथा सुनाते हुए बताया कि सात भाइयों की लाडली बहन वीरावती को चंद्रोदय से पहले ही भूख सताने लगी। उसका मुरझाया हुआ चेहरा उसके भाइयों से देखा नहीं गया और वह कुछ उपाय सोचने लगे। उन्होंने अपनी बहन से चंद्रोदय से पहले भोजन करने को कहा लेकिन वह नहीं मानी। उसने कहा कि जब तक चांद नहीं निकलेगा, तब तक वह भोजन नहीं करेगी। बहन की भूख से व्याकुल दशा देखकर सातों भाइयों से रहा न गया। उन्होंने पेड़ की आड़ में एक छलनी में दीपक जलाकर चांद जैसा दृश्य बना दिया। वीरावती ने उसे चांद समझकर अर्घ्य दिया और भोजन कर लिया। लेकिन भोजन करते ही उसके पति की मृत्यु हो गई और वीरावती विलाप करने लगी।

तब देवराज इंद्र की पत्नी इंद्राणी ने कहा कि तुमने करवाचौथ के व्रत में चंद्रोदय से पूर्व ही अन्न-जल ग्रहण कर लिया, जिसकी वजह से ऐसा हुआ है। अगर तुम मृत पति की सेवा करते हुए 12 महीने तक प्रत्येक चौथ को यथा विधि व्रत करोगी, फिर करवाचौथ को विधिवत गौरी, शिव, गणेश, कार्तिकेय सहित चंद्रमा का पूजन करोगी और चंद्र उदय के बाद अर्घ्य देकर अन्न-जल ग्रहण करोगी तो तुम्हारे पति अवश्य जीवित हो उठेंगे। ब्राह्मण कन्या ने ठीक ऐसे ही किया, व्रत के प्रभाव से उसका मृत पति जीवित हो गया। कहते हैं कि जो भी महिला करवाचौथ का व्रत विधि विधान से रखती है, उसके पति को अखंड सौभाग्य की प्राप्ति होती है।
वहीं इस दौरान महिला मंडल अध्यक्ष रेनू छाबड़ा और उपाध्यक्ष कंचन अरोड़ा ने सभी महिलाओं को करवाचौथ की बधाई देते हुए कहा कि युगल जोड़ियों पर भगवान की कृपा सदैव बनी रहे।



