रेबीज़ से बचाव का सबसे बड़ा मंत्र: काटते ही घाव धोएं, उसी दिन लगवाएं एंटी-रेबीज़ वैक्सीन
विश्व जूनोसिस दिवस पर सीबीगंज के तीन स्कूलों में जागरूकता अभियान, रैली और पोस्टर प्रतियोगिता; डॉक्टरों ने तोड़ीं रेबीज़ से जुड़ी भ्रांतियां

सीबीगंज, बरेली। रेबीज़ जैसी जानलेवा बीमारी से बचाव का सबसे प्रभावी तरीका समय पर उपचार है। यदि किसी व्यक्ति को कुत्ता, बंदर या कोई अन्य संदिग्ध पशु काट ले तो तीन दिन इंतजार करने की भूल बिल्कुल न करें। घाव को तुरंत साबुन और बहते पानी से अच्छी तरह धोकर उसी दिन एंटी-रेबीज़ वैक्सीन (एआरवी) लगवाएं। यह संदेश विश्व जूनोसिस दिवस के अवसर पर सीबीगंज स्थित वुडरो स्कूल, डॉल्फिन इंटरनेशनल स्कूल और एवीएस स्कूल में आयोजित जनजागरूकता कार्यक्रमों के दौरान प्रभारी चिकित्सा अधिकारी डॉ. मधु गुप्ता ने विद्यार्थियों, शिक्षकों और अभिभावकों को दिया।
कार्यक्रम के दौरान डॉ. मधु गुप्ता ने बताया कि जूनोसिस (ज़ूनोटिक) वे संक्रामक रोग हैं, जो पशुओं से मनुष्यों में फैलते हैं। इनमें रेबीज़, बर्ड फ्लू, ब्रुसेलोसिस समेत कई गंभीर बीमारियां शामिल हैं। उन्होंने कहा कि इन रोगों से बचाव के लिए व्यक्तिगत स्वच्छता, पालतू पशुओं का समय पर टीकाकरण और सुरक्षित व्यवहार अपनाना बेहद जरूरी है। थोड़ी-सी लापरवाही भी गंभीर परिणाम दे सकती है।

उन्होंने कहा कि समाज में आज भी रेबीज़ को लेकर कई तरह की गलत धारणाएं प्रचलित हैं। लोग पशु के काटने के बाद घाव पर हल्दी, मिर्च, मिट्टी, तेल या अन्य घरेलू पदार्थ लगा देते हैं या फिर कई दिनों तक इलाज का इंतजार करते रहते हैं, जबकि ऐसा करना बेहद खतरनाक है। उन्होंने स्पष्ट किया कि रेबीज़ के लक्षण दिखाई देने के बाद इसका उपचार संभव नहीं होता और यह लगभग 100 प्रतिशत घातक बीमारी है। हालांकि समय पर घाव की सही सफाई और एंटी-रेबीज़ वैक्सीन लगवाकर इससे पूरी तरह बचाव किया जा सकता है।
वुडरो स्कूल में आयोजित कार्यक्रम विशेष आकर्षण का केंद्र रहा। यहां विद्यार्थियों ने रंग-बिरंगे पोस्टरों और जागरूकता प्लेकार्ड के माध्यम से पशुओं से फैलने वाले रोगों के प्रति लोगों को जागरूक किया। इसके बाद निकाली गई जागरूकता रैली में विद्यार्थियों ने स्वच्छता, सुरक्षित व्यवहार और रेबीज़ से बचाव के संदेश दिए। डॉ. मधु गुप्ता ने विद्यार्थियों एवं शिक्षकों को जनस्वास्थ्य संरक्षण तथा जूनोसिस की रोकथाम की शपथ भी दिलाई। वहीं डॉल्फिन इंटरनेशनल स्कूल और एवीएस स्कूल में भी पोस्टर प्रतियोगिताओं के माध्यम से विद्यार्थियों ने अपनी रचनात्मकता के साथ जनस्वास्थ्य के प्रति अपनी जिम्मेदारी का परिचय दिया।
प्रतियोगिता में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले विद्यार्थियों को सम्मानित भी किया गया। वुडरो स्कूल की चारुल वर्मा, एवीएस स्कूल के अक्षित तथा डॉल्फिन इंटरनेशनल स्कूल की तृषा सिंह ने प्रथम स्थान प्राप्त किया। डॉल्फिन इंटरनेशनल स्कूल की वैष्णवी और वुडरो स्कूल की सृष्टि गंगवार द्वितीय स्थान पर रहीं, जबकि वुडरो स्कूल की रुचिका और डॉल्फिन इंटरनेशनल स्कूल की हनी गुप्ता को तृतीय पुरस्कार प्रदान किया गया।
कार्यक्रम के अंत में डॉ. मधु गुप्ता ने तीनों विद्यालयों के प्रधानाचार्यों, शिक्षकों और समस्त स्टाफ का आभार व्यक्त किया। उन्होंने हृदेश, मनमोहन, श्रवण, सरस्वती, सरिता, सूरज और मोनू के सहयोग की सराहना की। साथ ही आईडब्ल्यूसी ग्लोरी प्लस की सदस्य अफ़ज़ा, अनीता, सुनीता, रीना, वैशाली, सुरभि, दीपाली, डॉ. ममता पराशर, डॉ. रितिका भारद्वाज, डॉ. मोनिका गुप्ता और डॉ. कविता पाण्डेय की सक्रिय भागीदारी की भी प्रशंसा की। कार्यक्रम के समापन पर सभी विद्यार्थियों और शिक्षकों ने स्वच्छता अपनाने, जनस्वास्थ्य की सुरक्षा सुनिश्चित करने तथा जूनोसिस जैसी बीमारियों के प्रति समाज में व्यापक जागरूकता फैलाने का संकल्प लिया।



