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मातृभूमि के प्रति समर्पण से शुरू हुआ आरएसएस का सफर: अशोक कटारिया

पूर्व मंत्री व एमएलसी ने संघ की राष्ट्रनिष्ठा को बताया प्रेरणास्रोत

वंदेमातरम् की 150वीं जयंती पर विधान परिषद में विशेष चर्चा

लखनऊ: उत्तर प्रदेश विधान परिषद के शीतकालीन सत्र के दौरान वंदेमातरम् की 150वीं जयंती के अवसर पर आयोजित विशेष चर्चा में पूर्व मंत्री एवं विधान परिषद सदस्य अशोक कटारिया ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) की राष्ट्रनिष्ठा और विचारधारा पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि आरएसएस का जन्म ही मातृभूमि के प्रति समर्पण और राष्ट्रसेवा के संकल्प के साथ हुआ है। अशोक कटारिया ने कहा कि संघ की आलोचना करने वालों को भले ही इससे संतोष मिलता हो, लेकिन संघ का इतिहास और उसकी कार्यपद्धति राष्ट्रहित से जुड़ी रही है। उन्होंने संघ की प्रार्थना का उल्लेख करते हुए कहा “नमस्ते सदा वत्सले मातृभूमे, त्वया हिन्दुभूमे सुखं वर्धितोऽहम्।” यह पंक्तियां मातृभूमि को प्रणाम करने और उसके लिए निरंतर समर्पित भाव से कार्य करने की प्रेरणा देती हैं।

देश के लिए सर्वोच्च बलिदान की भावना के साथ कार्य करते हैं स्वयंसेवक

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पूर्व मंत्री व एमएलसी अशोक कटारिया ने कहा कि आरएसएस के स्वयंसेवक देश के लिए सर्वोच्च बलिदान की भावना के साथ कार्य करते हैं। वे व्यक्तिगत सुख-सुविधाओं और पारिवारिक बंधनों से ऊपर उठकर भारत माता के लिए जीने का संकल्प लेते हैं और समाज के विभिन्न क्षेत्रों में राष्ट्रसेवा को अपना जीवन उद्देश्य बनाकर सक्रिय रहते हैं। एमएलसी अशोक कटारिया ने कहा कि संघ के स्वयंसेवक शिक्षा, सेवा, संस्कृति और सामाजिक समरसता के क्षेत्रों में उल्लेखनीय योगदान दे रहे हैं। उन्होंने कहा कि वंदेमातरम् केवल एक गीत नहीं, बल्कि राष्ट्रभक्ति, आत्मबल और देश के प्रति समर्पण की चेतना है, जिसने देश की अनेक पीढ़ियों को राष्ट्रसेवा के लिए प्रेरित किया है।

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